हिंदू शास्त्र 4.32 अरब वर्षों के ब्रह्मांडीय चक्रों का वर्णन करते हैं — कार्ल सेगन के अनुसार आधुनिक ब्रह्मांड विज्ञान से तुलनीय एकमात्र प्राचीन समय-मान।
अधिकांश प्राचीन परंपराओं ने ब्रह्मांड को कुछ हज़ार वर्ष पुराना माना। केवल हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान अरबों में सोचता था — और समय को सृष्टि व प्रलय के विशाल आवर्ती चक्रों में बांटता था, जो अपने पैमाने और चक्रीय भावना में आधुनिक ब्रह्मांड विज्ञान की खोजों की प्रतिध्वनि है।
समय की हिंदू संरचना
- 1 महायुग (सत्य, त्रेता, द्वापर, कलियुग का चक्र) = 43.2 लाख वर्ष
- 1 मन्वन्तर = 71 महायुग ≈ 30.67 करोड़ वर्ष
- 1 कल्प (ब्रह्मा का दिन) = 1,000 महायुग = 4.32 अरब वर्ष, और उतनी ही लंबी रात्रि
- ब्रह्मा की आयु = 100 ब्रह्म-वर्ष ≈ 311 खरब मानव वर्ष — जिसके बाद चक्र पुनः आरंभ होता है
पुराण एक और स्तब्ध करने वाला विचार जोड़ते हैं: अनगिनत ब्रह्मांड, प्रत्येक का अपना ब्रह्मा, कारण-सागर में बुलबुलों की तरह तैरते — एक दृष्टि जो आधुनिक मल्टीवर्स परिकल्पना से विचित्र रूप से मिलती है।
कार्ल सेगन ने वास्तव में क्या कहा
अपनी युगांतरकारी श्रृंखला और पुस्तक कॉसमॉस (1980) में खगोलशास्त्री कार्ल सेगन ने लिखा:
"हिंदू धर्म विश्व के महान धर्मों में एकमात्र है जो इस विचार को समर्पित है कि ब्रह्मांड स्वयं असंख्य — वस्तुतः अनंत — मृत्युओं और पुनर्जन्मों से गुज़रता है। यह एकमात्र धर्म है जिसके समय-मान आधुनिक वैज्ञानिक ब्रह्मांड विज्ञान के समय-मानों के अनुरूप हैं। इसके चक्र हमारे साधारण दिन-रात से लेकर ब्रह्मा के 8.64 अरब वर्ष लंबे दिन-रात तक चलते हैं — पृथ्वी या सूर्य की आयु से अधिक, और बिग बैंग के बाद के समय का लगभग आधा।"
सेगन ने कॉसमॉस का एक भाग चिदंबरम नटराज मंदिर में फिल्माया, और शिव के ब्रह्मांडीय नृत्य को "आधुनिक खगोलीय विचारों का पूर्वाभास" कहा।
सच्चा गर्व
प्राचीन ऋषियों के पास दूरबीनें नहीं थीं, और हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान एक आध्यात्मिक दृष्टि है, भौतिकी का शोधपत्र नहीं। किंतु गहन काल, चक्रीय सृष्टि और अनेक लोकों की कल्पना का बौद्धिक साहस — विज्ञान के उन पैमानों तक पहुंचने से सहस्राब्दियों पहले — हमारी विरासत का प्रलेखित, विलक्षण तथ्य है। जिनेवा के CERN परिसर में भारत द्वारा भेंट की गई नटराज की प्रतिमा खड़ी है — परमाणु-कणों के ब्रह्मांडीय नृत्य के रूपक के रूप में।
रात्रिं युगसहस्रान्तां तेऽहोरात्रविदो जनाः॥